Reply to comment

नन्हें कदम ठुमुक जाते पथ

नन्हें कदम ठुमुक जाते पथ को
नन्हीं आँखें तकती हर शाम
नन्हीं बाँहें फैली-सी होंगी
नन्हीं जीभ लेती पिता का नाम

- शब्द नहीं हैं कविता की प्रशंसा के, पर पता है - पिता की आखें नम ....

Reply

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.

Theme by Danetsoft and Danang Probo Sayekti inspired by Maksimer