नन्हें कदम ठुमुक जाते पथ को नन्हीं आँखें तकती हर शाम नन्हीं बाँहें फैली-सी होंगी नन्हीं जीभ लेती पिता का नाम
- शब्द नहीं हैं कविता की प्रशंसा के, पर पता है - पिता की आखें नम ....
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नन्हें कदम ठुमुक जाते पथ
नन्हें कदम ठुमुक जाते पथ को
नन्हीं आँखें तकती हर शाम
नन्हीं बाँहें फैली-सी होंगी
नन्हीं जीभ लेती पिता का नाम
- शब्द नहीं हैं कविता की प्रशंसा के, पर पता है - पिता की आखें नम ....