कविता

कविता क्या है - एक निर्झरणी है

निर्झरणी है यह हमारे भावों की - प्रभावों की।

भाव जो बसे हमारे अंतर्मन में हैं
छू लेते हैं जो जग का कण-कण
समय का क्षण-क्षण।

भावनाएँ जिनमें मस्त हिलोरें भरती हैं
घटनाएँ जिन्हें जोर से झकझोर देती हैं

लो लेखिनी -
पकड़ सको, पकड़ो इन्हें
बाँध सको, बाधो इन्हें

पर हाय, मैं क्यों भूल गया,
कला को बाँधना भी है क्या संभव
और कविता -
यह भी तो एक कला है।।

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